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साधना व उपासना के षट्कर्म

आसन शुद्धि, पवित्रीकरण, शिखाबंधन, तिलक, आचमन, और कवच यह सब उपासना के षट्कर्म में आते हैं जिन्हे आप अपनी आव्यशक्ता अनुसार कर सकते हैं।

आसन शुद्धि – आसन को बिछा दें और उसे पानी के छींटे देकर पवित्र कर लें, इसके लिए या तो आप आसान पवित्रीकरण मंत्र पढ़ सकते हैं – 

ॐ पृथ्वि! त्वया धृता लोका देवि! त्वं विष्णुना धृता ⁠। 

त्वं च धारय मां देवि! पवित्रं कुरु चासनम् ⁠।⁠।

यदि यह मंत्र न पढ़ सकें तो ॐ नमः शिवाय अथवा गायत्री मंत्र बोल कर छींटे देदें अथवा सिर्फ गंगाजल छिड़कने से भी काम हो जायेगा।

सरलीकरण – आप इष्ट का नाम जपते हुए भी आसान पर जल का छिड़काव कर सकते हैं, इससे भी आसान पवित्र माना जायेगा।

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