आध्यात्मिक उत्थान व् आंतरिक शांति से शारीरिक स्वास्थ्य व् भौतिक समृद्धि देने वाला है शिव का नाम। हमारे शास्त्रों और पुराणों में भगवान शिव ने स्वयं बताया है कि हे वरानने, मेरा ‘शिव’ नाम ही सर्वोत्तम है, वही परब्रह्म है, ‘शिव’ यह नाम मुझ ब्रह्मकी अभिव्यक्ति है, शिव नाम से यथार्थ में मुझे ही समझो। जो वेदान्त से प्रतिपादित अव्यक्त ब्रह्म है, द्वैक्षर शिव भी वही है । दो अक्षरों का यह शिव नाम परब्रह्म स्वरूप एवं तारक है, इससे भिन्न कोई तारक नहीं।
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महादेव शिव शम्भू का नाम
भगवान शिव, जिन्हें महादेव या शंकर के नाम से भी जाना जाता है, सनातनी देवताओं के प्रमुख देवताओं (त्रिदेवों) में से एक हैं और इसमें सबसे महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। उन्हें विनाश, परिवर्तन, ध्यान और तपस्या के सर्वोच्च देवता के रूप में पूजा जाता है। हमारी पौराणिक कथाओं में, भगवान शिव को अक्सर कैलाश पर्वत पर ध्यान करते हुए एक योगी के रूप में चित्रित किया गया है, जिनके माथे पर तीसरी आंख है, उनके बालों पर एक अर्धचंद्र है, उनके हाथ में एक त्रिशूल है और उनकी गर्दन के चारों ओर एक सांप लिपटा हुआ है।
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